Thursday, 22 January 2026

Dil ki dhadkan by Kotarjpawan original


 Kotarjpawan (Original)

दिल की धड़कन नापता तो मैं भी हूँ, रात मे

दर्द होता है जब डॉक्टर नापता है।

उसकी पतली कमर नापता तो  मैं भी हूं रात मे

दर्द होता है जब पचास साल के दर्जी अब्दुल चाचा नापते है।

उसके नाजुक होठों को छूता तो में भी हूं रात में

 दर्द होता है जब ये ठंडी हवा छू के गुजर जाती है।

उसकी नाज़ुक कलाई पकड़ता तो मैं भी हूँ,रात मे

दर्द होता है जब मनिहारी वाला पकड़ लेता है।

उसके गौरे गौरे पैर पकड़ता तो मैं भी हूँ,रात मे

दर्द होता है जब चप्पल सैंडल वाला पकड़ लेता हैं 

तेरा इंतज़ार अब भी है,

मेरा रब , मेरा जहान तू अब भी है।

पवन कुमार चौहान

युवा कवि (insta - @kotarjpawan)

ये पवन कुमार चौहान कवि की original (मूल) रचना कविता है कृपया उपयोग में लेने पर क्रेडिट और टैग करना न भूले और अन्यथा में कॉपीराइट का उल्लंघन माना जायेगा 

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